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Saturday, 17 November 2018

स्पेन के गुर्जर गढ़

स्पेन मे गुर्जर:-

स्पेन के ग्रानाडा सूबे मे बहुत सी जगहों के नाम ऐसे है जो गुज्जर नाम से मिलते जुलते है इनमे से कासास दे गुइजररो(casas de guijarro) प्रमुख है इसके अलावा गोजर(gojar),गोर(gor), लोस गुअजारस(los guajares),ताजार(tajar),लूजर(lujar)मोबुजर(mobujar)ओगीजरेस(ogijares),गेरजल(gerjal)लुइजर(luijar),सोपोरतुजर(soportujar),उगीजर(उगीजर),ज़ुजर(zujar),अलमेगीजर(almegijar),काजर(cajar)एसुइजर(esiujar), इसके अलावा
हुएनेजा(hueneja),चौचिना(chauchina),बजाड़ो(bajado) कुछ ऐसे नाम है जो गुज्जरों की गोत्र से मिलते जुलते है।
ग्रेनाडा जिसका पुराना नाम ग्रेनाटा(stranger hill) था मे एक कोम आज भी बसती है ओर इस कोम का नाम है गुइजररो(guijarro) बोल चाल के लहजे मे गजररो(gjrro) बुलाया जाता है।स्पेन की गुइजररो(guijarro) जाती मूल रूप से पशु चारक थी जिसने तरक्की करके है स्पेन के हर सूबे मे अपना योगदान दिया है ये लोग ऊंचे कद,तीखे नैन नक्ष के पुरी तरह से आर्यन नस्ल के लोग है पर स्पेन के मूल यूरोपियन लोगो से रंग मे कुछ काले है।
इनकी उत्पत्ति के बारे मे अलग अलग विचार है इक धारणा के मुताबिक ये लोग श्वेत हून का इक कबीला थे जो अतीत मे भी गुइजर(गुइजर) नाम से जाना जाता था।ऐसा माना जाता है की ये श्वेत हून विशिगोथ लोगो के साथ स्पेन मे आया था।पांचवी सदि के शुरुआती दोर मे कोहकाफ(kohkaf,caucasus) के उत्तरी इलाके मे सफेद हुनो का विशिगोथ नाम की जाती को हराकर अपना गुलाम बना लिया था कुछ विशिगोथ भाग कर रोमन सम्राट की शरण मे चले गए थे ओर जब हूणों ने रोमन साम्राज्य पर हमला करके उसको भी हरा दिया तो ये विशिगोत स्पेन की तरफ चले गए ओर वहां टोलेडो(toledo) मे लगातार संघर्ष के दौरान इन जातियों मे आपसी विलयकरण होता रहा था बहुत से हून विशिगोथो के स्पेन पर हमले के दौरान विशिगोथ के साथी थे जबकि चौलोन(chaulon) की जंग मे बहुत से विशिगोथ हूनो के साथी थे ओर विशिगोथो का एक हिस्सा हूनो के खिलाफ रोमनो का साथ भी दे रहा था। कोहकाफ(kohkaf) मे गुलाम बनाया गया विसिगोथ पूरी तरह से हूणों मे समा गया था(भारत के गुज्जरों मे विशिगोथ/विशिगोरुस नाम मि एक गोत्र आज भी मौजूद है)।टोलेडो से आगे बढ़कर ग्रानाडा मे दाखिल होने मे विशिगोथो के प्रमुख सहायक गुइजर(guijar)ही था।
जब स्पेनी लोग दक्षिण अमेरिका महाद्वीप मे गया तो गुइजररो(guijarro) लोग भी काफी गिनती मे मैक्सिको(maxico),पोर्टो रीको(porto rico) आदि देशो मे जाकर बस गया जहा से उनके कुछ परिवार usa ओर कनाडा आदि देशो मे भी गया आज भी इन देशो मे ऐसे परिवार रहते है जो नाम के साथ गुइजररो(guijarro) ही लिखता है ओर बताता है।usa मे इन्हें गुअजर्डस(guajards) कहा जाने लगा है असल नाम गुअजर(guajar) है जेसे भारत मे गुर्जर गुजर,आमुहिक तोर पर गुआजरो (guajaro) को गुअजार्डस कह दिया जाता है।
अरबो के स्पेन के ऊपर हुए हमलों मे गुइजररो विशिगोथ से कंधे से कंधा मिलाकर लडा था।अरबो के स्पेन पर कब्जा कर लेने के बाद कुछ गुइजर(guijar) मुस्लिम भी बन गया था अरबो ने इन मुस्लिम गुइजरो को मुदेजर का नाम दिया।वेसे अरब गुइजररो(guijarro) को भारत के गुज्जरों की तरह ही ज़ुजर(zujar) कहता था।ज़ुजर नाम का इक दरिया भी पूर्वी ग्रेनाडा मे मौजूद है।
इन लोगो के लिए ये लाज़मी है की ये अपने नाम के पीछे अपनी जाती का नाम लिखे तथा शादिया भी अपनी ही जाती मे करते है।
ये हमारे लिए गर्व की बात है की गुर्जर दुनिया की सबसे बड़ी ओर अंतराष्ट्रीय नस्ल है।

Thursday, 21 December 2017

Gurjar history Book

gurjar leaders


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गायरी गुर्जर इतिहास

गायरी गुर्जर इतिहास

गायरी /गारी/ मेवाडा गायरी गुर्जर वंश -इंजी राम प्रताप सिंह गुर्जर
गायरी गुर्जर वंश का वो पन्ना हे जिसके बिन गुर्जर होते हुए भी , उनके लोग उनकी तरफ आने में परेशानियां पैदा कर देते हैं और ऐसा सिर्फ कुछ छोटे छोटे नेता और उनकी मन्द बुध्ददि और कुछ छोटे बच्चे जो इतिहास और उनके क्षेत्रों से परिचित तो नहीं हैं लेकिन उनके ऊपर उँगली  करते हैं ,
गारी, गायरी,भारुड़, भरवाड़ जातियां मूलत गुर्जर है
मेवाड़ा गायरी/गुर्जर/गारी/गाडरी/भारवाड़/भारुड़ - जाति एक नाम अनेक ये सभी वीर गुर्जर है। जोकि मेवाड़ मूल के है या मेवाड़ से निकले है। जो पशुपालन के कारण इतने नामों मे बटे है।
गुर्जर कितनी बड़ी जाती है यह अब पता चला है गायरी गुर्जर समाज के भाइयों को अभी भी नहीं पता है कि हम कितने हैं जो 100 किलोमीटर तक ही अपनी सीमा निर्धारित कर चुके वह समाज को नहीं पता कि हम गुर्जर हैं। 250-300 किमी के बीच 3 नामों में बटा समाज कितना अशिक्षित है इसकी कल्पना की जा सकती है। मेवाड़ - मेवाड़ा गाडरी/गायरी 2. मालवा - चौधरी ( मेवाड़ा गारी/गायरी) 3. हाड़ोती - गुर्जर (गायरी गुर्जर) गुर्जर कितनी बड़ी जाति एवं कौम है यह गायरी को आज तक नहीं पता है वह तो बस अपने को गायरी गुर्जर बोल देता है। और ज्यादा जीरह करो तो गायरी और गुर्जर दो भाई है, यह कह कर बात खत्म, और दन्त कहानी सुनने को मिलेगी की गायरी गाय के गर्भ से और गुर्जर उसकी जर से हुऐ हैं। जिस पर सिर्फ हंसी आती है। बल्कि ऐसा नहीं है, गुर्जर का संधि विच्छेद होता है - गुर्+जर जिसका अर्थ शत्रु विनाशक होता है, मध्य प्रदेश के धार,रतलाम,इंदौर एवं उज्जैन जिलों के विभिन्न गांवों में रहने वाले चौधरी(गायरी) झालावाड़, मेवाड़ ,आदि जगहों पर भी  यह लोग गायरीoगायरी/गायरी/रेवारी- ये उपजातियां राजस्थान में प्रचलित
गायरी शव्द की उत्पत्ति -गायरी नाम मेवाड़ झालावाड़ तथा मध्यप्रदेश की सीमा से सटीक हे ! गायरी शव्द की दन्त कथाओं के अनुसार गायरी गाय के गर्भ से पैदा हुए हैं जो सुन ने में हमे अच्छा लगता हे लेकिन इसका ऐतिहासिक अवलोकन किसी इंसान ने नहीं किया हे खुद गायरी गुर्जर भी इसमें ही ज़िंदा हैं education का
ायरी शवद की उत्पत्ति उनके कर्म के अनुसार उनकी पहचान बनी हे ,मेवाड़ क्षेत्र सै गायरी की उत्पत्ति  समझ में आती हे जिसमे इन लोगों के अलग काम /व्यवसाय वट गए जिसमे गायरियो ने जो व्यवसाय चुना वो था गाय पालन /गौ रक्छक /गाय रखने वाला आदि इनके नाम पड गए  जिसका शुध्ध रुप जो है वो आज गायरी /गारी बन गया जबकि गडरिया जो हे वो भेड पालन करते हैं उनका व्यवसाय अलग , उनका जाती भी अलग हे क्यों की गडरिया एक जाती हे और गायरी एक गोत्र हे जो देव नारायण भगवान् के उपासक हैं !
प्रभावी क्षेत्र- गायरियों के प्रभावी क्षेत्र में मालवा इंदौर उज्जैन रतलाम मंदसौर झालावाड़ मेवाड़ क्षेत्र में मौजूदगी बहुत ज्यादा मात्रा में हे और ये सभी अपने को गुर्जरों से अभिन्न नहीं मानते हैं बल्कि गुर्जर ही मानते हैं इनमे आज १५० सै ज्यादा गोत्र बन चुके है जो आज मौजूद हैं

मध्य प्रदेश के धार,रतलाम,इंदौर एवं उज्जैन जिलों के विभिन्न गांवों में रहने वाले चौधरी(गायरी) लिखते हैं चुनेधार(Dhar)रतलाम(Ratlam)इंदौर(Indore)उज्जैन(Ujjain) आदि मै आते हैं

धार(DHAR)
बुकड़ावदा खेड़ी(Bukdavada Khediघटगारा(Ghatgara)बालौदा माजी(Baloda Maji)पडुनिया(Paduniya)खरेली(Khareli)बदनावर(Badnawar)संदला(Sandala)तिलगारा(Tilgara)भैंसोला(Bhainsola)लीलीखेड़ी(Lilikhedi)मुल्थान(Multhan)बेगन्दा(Beganda)रूणिजा(Runija)छौ छोटी(Chho Chooti)छौ बड़ी(Chho Badi)सनोली(Sanoli)कोद(Kod)बिड़वाल(Bidwal)शेरगढ़(Shergarh)बरमंडल(Barmandal)पंचमुखी(Panchmukhi)कुसावदा(Kusavada)मुसावदा(Musavada)खैरोद(Kherod)सादलपुर(Sadalpur)वरनासा(Varnasa)कणवा(Kanwa)गोगाखेडी(Gogakhedi)भाटबामन्दा(Bhatbamanda)
देवड़ा/दीवड़ा: गुर्जरों की इस खाप के गाँव गंगा जमुना के ऊपरी दोआब के मुज़फ्फरनगर क्षेत्र में हैं| कैम्पबेल ने भीनमाल नामक अपने लेख में देवड़ा को कुषाण सम्राट कनिष्क की देवपुत्र उपाधि से जोड़ा हैं|


दीपे/दापा: गुर्जरों की इस खाप की आबादी कल्शान और देवड़ा खाप के साथ ही मिलती हैं तथा तीनो खाप अपने को एक ही मानती हैं| शादी-ब्याह में खाप के बाहर करने के नियम का पालन करते वक्त तीनो आपस में विवाह भी नहीं करते हैं और आपस में भाई माने जाते हैं| संभवतः अन्य दोनों की तरह इनका सम्बन्ध भी कुषाण परिसंघ से हैं|

नेकाड़ी: राजस्थान के गुर्जरों में नेकाड़ी धार्मिक दृष्टी से पवित्रतम गोत्र माना जाता हैं| अफगानिस्तान और भारत में नेकाड़ी गोत्र पाया जाता हैं| राजस्थान के गुर्जरों में इसे विशेष आदर की दृष्टी से देखा जाता हैं| नेकाड़ी मूलतः चेची माने जाते हैं|

पोसवाल >बांणिया -  पोसवाल का ही दूसरा नाम है बांणिया जो की हिमाचल ,उत्तराखंड ,मे ज्यादा बांणिया लिखते हैं तथा मालवा और मेवाड के    बीच मे भी  इनको बांणिया कहते हैं।

बामणिया- यह भी  बाणियां का विक्रत रुप है इसका मूल पोसवाल ही हैं।

कोली>कौली - कोली गोत्र मूल रूप सै पंजाब मै गुर्जरों के कोली गोत्र के 60 गांव हैं जो हिमाचल प्रदेश की  सीमा पर हैं।

कोरी/लोहिया/लोहमोड/लुवाणा(लोहारिया)-ये सभी  नाम ऐक ही गोत्र के हैं जो की क्षेत्र के अनुसीर अपनी अपनी भाषा मै विक्रत हो गये हैं
गुर्जरघार मे कोरी और लोहिया कहते हैं जिनके गांव भिन्ड मुरैना तथा ग्वालियर मे हैं ,लोहमोड नाम पंजाब उत्तरप्रदेश मे बहुत हैं और लुवाणा और लोहारिया के नाम सै मालवा तथा मेवाड के आस पास हैं।

भरगाड/भंडावर/भरवाड- भरगाड मूल रूप सै जयपुर के आस पास हैं तथा भंडावर मूल भरगाड का अप्रभंस है ।

हाकला/हकला- मेवाड दुर्ग के दक्क्षिण मे रहते थे ये लोग तथा भारत पाक अफगान आदि मे मौजूद हैं
पन्ना गूजरी के गांव के हांकला गोत्रीय गूजर चित्तौड़ के दुर्ग के दक्षिणी भाग के रक्षक तथा निवासी थे

बाघमार/बघमार/रावत
"अर्थात बाघ को मारने वाला - बाघमार"
गायरी गुर्जर वंश महान
यह मेवाड़ा गायरी/गायरी गुर्जरों में एक प्रसिद्ध गोत्र है, जिसे रावत भी कहा जाता है यह गोत्र बगड़ावत/ बगरावत/ बाघरावत से सीधे संबंधित है।
24 भाई बगड़ावत के पिताजी जिनका नाम बाघरावत उनके पिता हरिराम जी ने एक बाघ को मार गिराया था। यह हम बगड़ावत भारत में सुनते हैं तथा बड़े बुजुर्गों से भी सुनते आए हैं उसके पश्चात उनके पुत्र "बाघरावत" का जन्म हुआ जिनका मुंह तो बाघ/शेर का व बाकी धड़ मनुष्य का हुआ था। बाघ को मारने वाला बाघमार ही हो सकता है। यह गोत्र स्पष्ट दर्शित करता है बगड़ावतों के गायरी गुर्जर कुल का होने से आज के गायरी गुर्जर मेवाड़ा गायरी तत्कालीन समय में मेवाड़ के मूल निवासी थे उसके पश्चात अन्य जगहों पर बस गए।
 गोत्र -
सरकारी प्रमाण गायरी गुर्जर-गायरी गुर्जर हैं इस बात के हमने सबूत दिए हैं अब इनको धनगर बोलने बालों के पास कितने सबूत हैं वो दिखाएँ और ऐसा ही नहीं गायरियों की पुराणी  शादियां गुर्जरों में ही हुयी हैं , अगर आप के पास कोई सबूत हो तो जरूर बताओ ,

मवाड राजवंश - पन्ना धाय का जिस मेवाड़ राजवंश से  सम्वन्ध वो पन्ना धाय को इतिहासकार डॉ.व्यास ने गायरी गुर्जर बताया हे , पन्ना का सम्मान सभी समाज में उतना ही हे जितना मेवाड़ वंश का हे पन्ना धाय माँ को ""दामोदर लाल गर्ग"" ने अपनी पुस्तक ""राजधात्री पन्ना गुजरी"" में लिखा हे की ये वीरमाता गुर्जर कुल से थी और उन्होंने लिखा हे की इनका सम्बन्ध गुरुजन तथा गुर्जर , गोर्जन बताया हे,अब हम इनके सम्बन्धों पर भी  बात करते हैं,जो तथ्ययातमक हैं,माता पन्ना धाय को ऊपर डॉ. व्यास ने ऊपर गायरी लिखा हे क्यों की आज यही सवाल हमारे लोगों के जहाँ में हे की इनकी शादियां क्यों नहीं होती हैं पन्ना धाय की ससुराल गुर्जर चौहान कुल में थी चौहान हिन्दू जी गुर्जर के पुत्र गुर्जर लाला गुर्जर के पुत्र  सूरजमल गुर्जर चौहान की पत्नी थीं,
हम लोगों को ये समझना चाहिए की मेवाड़ रियासत के राजवंश की फौज में गुर्जर ही सबसे ज्यादा थे और मेवाड़ के आस पास  गायरी  ज्यादा हैं. गुर्जर कम हैं फिर ये बात सही कैसे हो सकती हैं , लेकिन ये बात सही हे क्यों की उस टाइम पे गायरी वर्ड ही नहीं था तो गायरी भी गुर्जर ही कह जाएंगे क्यों की गायरी. तो कुछ नाम नहीं था मतलब की गायरी ही मेवाड़ वंश की फौज में थे और इनपे ही राणा परिवार को भरोसा भी था
पन्ना गूजरी के गांव के हांकला गोत्रीय गूजर चित्तौड़ के दुर्ग के दक्षिणी भाग के रक्षक थे दक्षक्षिणी भाग की और
सुरक्षा भी  गूजर कर रहे थे, महल के अन्दर पन्ना धाय
उनके पुत्रों की रक्षा कर रही थीं, पन्ना धाय  के पिता हरचंद हाकला जी ने राणा संग्राम के साथ लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए थे ,


             
नोट-गायरी गुर्जर हैं गडरिया जबरस्ती या धनगरी करण इतिहास ना बिगाडें

Wednesday, 6 December 2017

late.yashwant singh ghuraiya

स्व.यशवन्त सिंह घुरैया

shri ysvant singh ghuraiya (sp)
DOB-22/3/1928 village पारसेन जिला ग्वालियर
fathers name -shri kiledar singh ghuraiya
wife name-bhaagyavati ghuraiya
son name -rajendra singh (dsp mp police )
नाती -somitra ghuraiya (डिप्टी कमान्डेन्ट bsf )
शिक्षा-primary education in village
    b.a-lashkar Gwalior
    llb. in Gwalior
देश भक्ति-
1954  (madhya pradesh police ) me उपनिरिक्षक पद पर प्रशिक्षण लेके राजगढ (व्यावरा)
गुना  जिले मे पदस्त हुये
गुर्जर डकैतो को रोकने के लिये भिण्ड जिले के गोरमी मे स्थानान्तरण कर दिया
us time chambal me GABBAR ,,PUTLI BAAI ,,,KALLA PANA ,,,HARGOVIND SINGH ,,,,SULTAN SINGH ,,,,RUPA MUKHIYA ,,,ETC
डकैत खोफ का आतन्क थे
इन के आतन्क को कुछ हद तक कम करने मे सफल रहे गुर्जर shri yasvant singh ji again transfer ho gaya
पुनः स्थानान्तरण भिण्ड जिले के ऊमरी थाना   मे फिर कोसड सुरपुरा थाना मे हुआ  था
पुनः स्थानान्तरण हो ग्या इस बार shri narsingh rao home minister ne khud kar diya aur thana prabhari bana diya
chori ka maal ऊटों se up to.mp आवागमन किया जाता था
लेकिन नये थाना प्रभारी जी ने सब खत्म कर दिया और
और माखन जाटव के आतंक को जनता के दिलो से खत्म करने के लिये ५किलो का जूता अटेर के निवासी से बनबाके कोतवाली के दरबाजे पे टांग दिया था
लेकिन उनका स्थानान्तरण पुनः हो गया इस बार पावई और पावई सै मुरैना drp line me सूबेदार के पद पर हो गया
कुछ दिन बाद RI बन गये और और सभी  बर्गो के लोगो को पुलिस मे भर्ति किया  इन विषि्ट कार्यो के चलते उनको   राष्ट्रपति उत्कृष्ट पदक से नबाज गया
घूरैया साहब RSS और राष्ट्रवादी विचारधारा के सम्राट थे
 DSP बन कर  घुरैया साहब 1981 me BHIND मे पुनः आगये
मुटभेड-->>
छिडियापुरा गाँव  मुटभेड
drp line मुटभेड मुरैना
चुरहेला गाँव  मुटभेड
21/10/1981 पान सिंह तोमर से हुयी
1981 me ghuraiya saahb sp बन गये

समाज सेवी कार्य-->>१--BHIND GURJAR BHAVAN
BHIND KE GURJAR BHAVAN KE NIRMAD KE LIYE GURJAR BHAIYO NE 2बीघा JMEEN KHARIDI AUR NIRMAD START KARA DIYA LEKIN GURJAR BHAVAN KE SAAMNE OLD SADAR RAASTA THA JIS PAR EK HARJAN PARIVAR KA KABJA THA  BO RAASTA 60feet choda tha  न्यायालय  ने उस ko 15din ki saja sunayi  aur fir gurjar bhavan ka kaarya prarambha ho gaya
2.गोहद का गुर्जर भवन- 2 mahine me gohad ke gurjar bhavan ko complet kara diya tha
अन्य पद -- दतिया कमान्डेन्ट  के पद पर
सुपरिटेन्डेन्ट भिन्ड
जबलपुर मे भी  sp ban ke rahe

1992 --- मध्य प्रदेश विधान सभा के चुनाव के लिये  मुरार विधान सभा से टिकिट माँगा लेकिन राजमाता के भाई ध्यानेन्द्र सिंह को मुरार से टिकट  दे दिया था भारतीय जनता पार्टी ने लेकिन घुरैया साहब को मुरैना के सुमावली विधान सभा से दे दिया लेकिन ऊधर के पूर्व विधायक जोगेन्द्र सिह राणा (गुर्जर) के साथ अन्याय था ये इसी के चलते घुरैया साहब ने अपना नाम बापस ले लिया
पद---RSS प्रवक्ता
किसान संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष
नागरिक सहकारी बैक के डायरेक्टर
अनन्त की यात्रा ---->>> अन्तिम दिनो मै कैंसर रोग से पीडित 13/2/1999  महाशिवरात्री को समाज सेवी का गुम हो गये